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खाती गांव के ग्रामीणों का कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन

बागेश्वर: जिले के अंतिम गांव खाती के लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। बिजली, सड़क और संचार व्यवस्था के अभाव में बुधवार को ग्रामीण एकत्रित होकर कलक्ट्रेट परिसर पर धमक गए।

नारेबाजी के साथ वहां उन्होंने प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि जल्द से जल्द उनका गांव पटरी पर नहीं आया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। ग्रामीण करीब बीस किमी पैदल और 35 किमी वाहन से चलकर जिला मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने बताया कि पिडारी ग्लेशियर को जाने वाले साहसिक पर्यटक खाती गांव में ही विश्राम करते हैं, जो बीते दिनों भारी बर्फबारी के बाद अलग-थलग पड़ा है।

गांव तक सुविधा पहुंचाने की खातिर पूर्व में सड़क का टेंडर भी निकाला गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। ग्राम पंचायत में विद्युतीकरण भी नहीं हो सका है। नवंबर 2018 में एक माह के लिए बिजली दी गई, तब से कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।

मोबाइल सेवा भी अभी तक नहीं है। विश्व प्रसिद्ध पिंडारी, कफनी, सुंदरढूंगा ट्रैकिग रूट का खाती अंतिम गांव होने से वहां देसी-विदेशी पर्यटकों का हुजूम उमड़ता है। सुविधाओं के अभाव में इन पर्यटकों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

इस मौके पर राजेंद्र सिंह, राहुल टाकुली, दयाल, खुशाल सिंह, भगवत सिंह, आनंद सिंह, चांदानी दानू, लछम सिंह, हयात सिंह, हरेंद्र दानू आदि मौजूद थे।  खाती जिले का है अंतिम गांव कपकोट तहसील अंतर्गत खाती गांव इन दिनों चारों तरफ से बर्फ से ढका है।

ग्रामीण बर्फ पिघलने का इंतजार कर रहे हैं। बुधवार को गांव निवासी सरस्वती बीमार पड़ गई, जिन्हें कपकोट सामुदायिक अस्पताल लाने के लिए युवाओं को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। गांव के यामू सिंह ने कहा कि करीब आठ किमी पैदल चलने के बाद वह खरकिया पहुंचे।

वहां से भी काफी आगे पैदल चलने के बाद उन्हें टैक्सी मिल सकी। -वर्जन- खाती के लिए दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत काम चल रहा है। विषम परिस्थिति और बर्फबारी के कारण काम रुका हुआ है। अभी वहां करीब चार फीट तक बर्फ है। ऊर्जा निगम जल्द आपूíत करने की कोशिश करेगा।

पिडर घाटी को सड़क, बिजली, पानी, संचार आदि से जोड़ने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। लोगों की मांग भी जायज है। विभागों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। बर्फबारी की अधिकता से गांव में सुविधाओं को पटरी पर उतारने में दिक्कत हो रही है।

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