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खबर छपने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप

रुद्रपुर : शिक्षकों के वेतन से टीडीएस की कटौती करने के बाद भी आयकर का भुगतान न करने का मामला दैनिक जागरण में प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया है।

जिम्मेदार अफसर अपनी गलती एक-दूसरे पर डाल रहे हैं। इधर, फर्म स्वामी के मुताबिक गलत फर्म का नाम डाल विभाग उसे बदनाम कर रहा है।

ऐसे में शिक्षकों की देनदारी बढ़ सकती है। सूत्रों से पता चला है कि खबर छपने के बाद आयकर विभाग शिक्षा विभाग पर नजर रखे है।

वेतन से टीडीएस की कटौती होने के बाद भी आयकर का भुगतान न होने से अफसरों की लापरवाही का खामियाजा शिक्षक भुगत रहे हैं। जसपुर के राजकीय इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त शिक्षक रामचंद्र सिंह की शिकायत के बाद राज्य सूचना आयुक्त चंद्र सिंह नपलच्याल ने मामले का संज्ञान लिया है।

मामले की सुनवाई होने पर शिक्षा विभाग की ओर से दलील दी गई है कि वर्ष 2013 से 2018 तक के आयकर संबंधित कार्य एक फर्म को दिए थे। उसी की ओर से यह कार्य किया जाना था।

जबकि आयकर विभाग के नियम के तहत जिस व्यक्ति के नाम पर टैन नंबर जारी है, आयकर भुगतान संबंधित जिम्मेदारी भी उनकी बनती है। खबर छपने के बाद बुधवार को फर्म स्वामी को बुलाया गया था, लेकिन निष्कर्ष शून्य निकला।

अपर जिला शिक्षा अधिकारी के नाम था टैन

वर्तमान सीईओ रमेश चंद्र आर्य 2013 में डीईओ पद पर थे। वर्तमान डीईओ बेसिक एके सिंह तब अपर जिला शिक्षा अधिकारी पद पर थे। तत्कालीन डीईओ आर्य का कहना है कि तब टैन नंबर वर्तमान डीईओ बेसिक एके सिंह के नाम से जारी था।पहले जिले से होती थी टीडीएस की कटौती

 

2013 तक शिक्षकों के वेतन से टीडीएस की कटौती जिला स्तर पर होती थी। इसके आहरण वितरण अधिकारी अपर जिला शिक्षा अधिकारी थे।

अब सभी उप शिक्षा अधिकारियों के नाम से टैन नंबर जारी होता है। टीडीएस की कटौती भी संबंधित ब्लॉक से की जाती है।

इससे पहले भी हो चुकी धांधली

शिखा विभाग में 2016 में सितारगंज ब्लॉक में भी इसी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई थी। तत्कालीन आयकर अधिकारी आबिद अली ने उप शिक्षा अधिकारी सितारगंज पर डेढ़ लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई थी।

फर्म स्वामी को बुलाया गया है। आवश्यक दस्तावेज मुहैया कराने के लिए सभी ब्लॉकों को सूचित कर दिया गया है।

 

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