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एमबीपीजी कॉलेज में समितियों के नाम पर बड़ा खेल

हल्द्वानी : एमबीपीजी वकॉलेज में समितियों के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। कॉलेज व छात्र हितों के नाम पर गठित 19 समितियां क्या काम कर रही हैं कॉलेज प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं। कहना है कि इस संबंध में सूचना नहीं है।

जब समितियों के कार्यों का ही पता नहीं तो फिर बजट किसे दिया जा रहा है। ये खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआइ) में हुआ है। कॉलेज प्रशासन से गठित समितियों की संख्या, गठन की तिथि, समितियों द्वारा किए गए कार्य, उपलब्धियां, लंबे समय से निष्क्रिय समितियों पर कार्रवाई समेत सात बिंदुओं पर सूचना मांगी गई थी। जवाब में कॉलेज प्रशासन द्वारा दी गई सूचना गले नहीं उतर रही। कहा गया है कि समितियों की उपलब्धियां व समितियों द्वारा कराई गई गतिविधियों की सूचना धारित नहीं है।

एमबीपीजी में पत्रिका प्रशासन समिति, महाविद्यालय विकास समिति, शोध एवं प्रसार समिति, समारोह समिति, करियर काउंसलिंग प्लेसमेंट सेल, वेबसाइट समिति, सांस्कृतिक कार्यक्रम समिति, आपदा प्रबंधन समिति, एनसीसी, एनएसएस आदि प्रमुख समितियां हैं।

इनमें से कुछ ऐसी समिति हैं जो समय-समय पर कार्यक्रम कराती हैं। जिसमें खर्चा आना लाजिमी है। विभिन्न मदों से इसकी पूर्ति की जाती है। लेकिन जब कॉलेज प्रशासन के पास कार्यक्रमों का लेखा-जोखा ही नहीं है तो वह किस आधार पर बजट समितियों को बांट रहा है।

 

…आखिर क्यों छिपाई जा रही सूचना

 

सवाल यहां यह भी है कि आखिर कॉलेज प्रशासन क्यों सूचनाएं छिपा रहा है। जबकि, प्राचार्या का कहना है कि

 

सभी समितियों के कार्यों का लेखा-जोखा रखा जाता है।

 

जानिए क्‍या कहते हैं जिम्‍मेदार

 

डॉ. एनपी माहेश्वरी, निदेशक उच्च शिक्षा ने बताया कि प्रत्येक समिति को सक्रिय रहना जरूरी है। वे क्या कार्य करती हैं कितना बजट लेती हैं इसका ब्योरा कॉलेज प्रशासन के पास होना चाहिए।

वहीं डॉ. बीना खंडूड़ी, प्राचार्य, एमबीपीजी कॉलेज का कहना है कि समितियों द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी रखी जाती है। कई समितियां साल भर कार्यक्रम आयोजित कराती हैं। जिसका खर्चा विभिन्न मदों के बजट से उठाया जाता है।

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