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उपेक्षा का शिकार उत्तराखंड का ऐतिहासिक रॉक कट टेंपल

थल, जिले की ऐतिहासिक विरासत पुरातात्विक विभाग की उपेक्षा का शिकार हो रही हैं। देखरेख नहीं होने से इन विरासतों के धराशायी होने का खतरा बढ़ रहा है। ऐसी ही विरासतों में शामिल है थल का रॉक कट टेंपल ( एक हथिया देवाल)।

 

थल क्षेत्र के अल्मियां और बलतिर गांव के बीच स्थित भोलिया की छीड़ नामक चट्टान पर बना यह टेंपल इस मामले में विशेष है इसे एक चट्टान को काटकर बनाया गया है। आठवीं शताब्दी के कत्यूरी शासनकाल की यह विरासत लंबे समय से उपेक्षित पड़ी हुई है। टेंपल के संरक्षण के लिए कोई पहल नहीं हुई है। लगभग उजाड़ स्थित में पहुंच रहे टेंपल के चारों ओर झाड़ियां उगी हुई हैं। वर्षों से इसमें रंग रोगन नहीं हुआ है।

पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे इस टेंपल को अब दूर से ही लोग निहार लेते हैं। मंदिर तक आम लोगों की पहुंच बहुत कम रह गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पुरातत्व विभाग टेंपल की देखरेख के लिए पहल करे तो यह पर्यटन विकास में मददगार साबित हो सकता है।

मंदिर में नहीं होती पूजा-अर्चना थल: एक हथिया देवाल में श्रद्धालु पूजा अर्चना नहीं करते।

इसका कारण है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग और प्रवेश द्वार दक्षिण दिशा की ओर है। मान्यता है कि शिवलिंग उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। श्रद्धालु मंदिर में आते तो हैं, लेकिन पूजा अर्चना नहीं करते। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक कलाकार ने एक ही रात में एक ही हाथ से चट्टान काटकर किया, इसलिए इसे एक हथिया देवाल कहा जाता है।

एक हथिया देवाल राज्य की पुरातात्विक सूची में शामिल है। इसके संरक्षण के लिए समय-समय पर कार्य किए जाते हैं। शीघ्र ही मंदिर की साफ-सफाई और संरक्षण के लिए अन्य कार्य कराए जाएंगे।

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