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उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों की पचास फीसद घोषणाएं अधूरी

देहरादून, उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों के स्तर से की गई घोषणाओं में से आधी पूरी नहीं हुईं। इनमें वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ ही सात पूर्व मुख्यमंत्रियों (आठ कार्यकाल) की 1730 घोषणाएं ऐसी हैं, जिनका अता-पता नहीं है।

 

प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री दिवंगत नित्यानंद स्वामी की 33 और उनके बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले भगत सिंह कोश्यारी की 11 घोषणाओं का क्या हुआ, इसका कोई विवरण मुख्यमंत्री कार्यालय के पास नहीं है। मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं की यह तस्वीर आरटीआइ कार्यकर्ता हल्द्वानी निवासी गुरविंदर सिंह चड्ढा की ओर से आरटीआइ में मांगी गई जानकारी में सामने आई।

आरटीआइ के दस्तावेजों के मुताबिक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (छह फरवरी 2020 तक) व पूर्व के सात मुख्यमंत्रियों ने 9827 घोषणाएं की हैं। इनमें से अभी तक 5103 घोषणाएं ही पूरी हो पाई हैं। यानी कि 51.92 घोषणाएं ही ऐसी रहीं, जिन पर काम किया जा चुका है।

 

घोषणा करने में सबसे तेज रफ्तार कांग्रेस सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की रही। उन्होंने तीन साल के कार्यकाल में सर्वाधिक 3814 घोषणाएं कीं। हालांकि, घोषणाओं की पूर्ति में भी वह सबसे आगे हैं। उनकी 57.70 फीसद घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं और अभी तक 1343 घोषणाओं पर काम चल रहा है।

घोषणाओं की पूर्ति में वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत दूसरे स्थान पर हैं। अब तक उनकी 56.55 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं और उनका कार्यकाल भी अभी शेष है। दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत एनडी तिवारी की सर्वाधिक 65.13 फीसद घोषणाएं अधर में हैं। सीधे शब्दों में कहें तो उनकी घोषणाओं की फाइल अब बंद हो चुकी है।

 

खंडूड़ी ने जितना कहा, उतना किया काम

 

भाजपा सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (रिटा.) दो बार मुख्यमंत्री रहे। पहले कार्यकाल में उन्होंने जितनी घोषणाएं कीं, उनमें 50 फीसद से अधिक पर काम पूरा हो चुका है और शेष पर काम गतिमान है। इन घोषणाओं को भी मिला दिया जाए तो सिर्फ 0.85 फीसद काम ही शेष रह जाते हैं। वहीं, दूसरे कार्यकाल में की गई उनकी सभी 33 घोषणाओं पर काम पूरा किया जा चुका है।

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