देहरादून

इस सीजन भी मसूरी में मल्टीलेवल पार्किंग के आसार नहीं

देहरादून,  पर्यटन सीजन में पहाड़ों की रानी मसूरी देश-विदेश के सैलानियों से पूरी तरह पैक रहती है। बाहर से आने वाले पर्यटकों को सबसे अधिक परेशानी पार्किंग को लेकर उठानी पड़ती है।

राज्य गठन से लेकर अब तक पर्यटकों की संख्या में करीब साढ़े तीन गुना का इजाफा हो गया है और अब तक हम एक अदद कार पार्किंग भी मुहैया नहीं करा पाए हैं। कुछ इसी मकसद से पर्यटन विभाग के बजट से वर्ष 2015 में किंक्रेग में पांच मंजिला मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण शुरू जरूर किया गया था, मगर काम की लचर रफ्तार यह है कि चार पांच साल में भी कार पार्किंग का निर्माण पूरा होने की उम्मीद दूर की कौड़ी नजर आ रही है।

 

मल्टीलेवल कार पार्किंग का निर्माण कायदे से जून 2017 तक पूरा कर दिया जाना चाहिए था, जबकि इस डेडलाइन तक पार्किंग का काम भी ढंग से शुरू भी नहीं हो पाया था। इसके बाद कार्यदायी संस्था लोनिवि प्रांतीय खंड ने निर्माण कंपनी को जुलाई 2018 की दूसरी डेडलाइन तय की। जब यह डेडलाइन बीतने को थी, तब जाकर जमीन पर कुछ ढांचानुमा चीज दिखाई दी। तब अधिकारी कह रहे थे कि वर्ष 2019 के पर्यटन सीजन तक सैलानियों को पार्किंग का लाभ मिलने लगेगा, मगर यह उम्मीद भी परवान नहीं चढ़ पाई। फिर लोनिवि ने काम पूरा करने के लिए तीसरी डेडलाइन तय की।

अब 2020 के पर्यटन सीजन को शुरू होने में महज एक माह का समय शेष है और सिर्फ चार मंजिल का ढांचा ही खड़ा हो पाया है। इसकी छत भी बुधवार को डाली गई। इसके बाद एक मंजिल का निर्माण और होगा, साथ ही लोहे के कॉलम व अन्य काम किए जाएंगे। ऐसे में स्पष्ट है कि अभी भी तीन से चार माह का काम और शेष है।

 

शुरुआत से ही होती रही हीलाहवाली

 

पार्किंग के लिए अक्टूबर 2015 में टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इसका जिम्मा फरीदाबाद, हरियाणा की कंपनी ऋचा इंडस्ट्रीज को सौंपा गया था। समय पर काम शुरू न कर पाने पर लोनिवि ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी शुरू कर दी थी। तब मुख्य अभियंता स्तर-प्रथम कार्यालय ने ठेकेदार को एक और मौका देते हुए पांच जुलाई 2019 तक काम पूरा करने को कहा था। ठेकेदार को बेशक एक अवसर और मिल गया, मगर काम की रफ्तार तब भी नहीं बढ़ पाई। इसकी बड़ी वजह रही गलत डिजाइन। कंसल्टेंट ने जो डिजाइन तैयार किया था, वह तकनीकी रूप से ठीक नहीं था। इसके बाद आइआइटी रुड़की से नया डिजाइन तैयार कराया गया और इसी के अनुरूप डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में भी संशोधन किया गया।