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आरोग्य मेले के मंच में जगह न मिलने पर भड़के महापौर

देहरादून, आरोग्य मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में मंच पर बैठने की जगह न मिलने से नाराज महापौर सुनील उनियाल गामा दर्शक दीर्घा में जाकर बैठ गए। कार्यक्रम शुरू होने पर आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने यह देखा तो उन्हें मंच पर बुलाया। आयोजक महापौर को मंच पर लाने पहुंचे तो उनका गुस्सा फूट पड़ा।

 

आयोजकों के काफी देर तक मान-मनौव्वल करने के बाद वह मंच पर बैठने को राजी हुए। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष भी आयोजकों की इस हरकत पर नाराजगी व्यक्त की। परेड ग्राउंड में आरोग्य मेले के उद्घाटन के लिए बने मंच पर 10 से अधिक गण्यमान्य लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। जिन्हें मंचासीन होना था, उनके नाम की पट्टिका बाकायदा आगे टेबल पर रखी गई थी।

महापौर भी कार्यक्रम में पहुंचे थे, लेकिन मंच पर उनके नाम की पट्टिका नहीं थी। इसके चलते वह दर्शकदीर्घा की पहली पंक्ति में जाकर बैठ गए। कार्यक्रम शुरू होने के बाद जैसे ही मुख्य अतिथि राज्यपाल बेबीरानी मौर्य व अन्य विशिष्ट अतिथि मंचासीन हुए तो संचालक एक-एक कर उनका परिचय देने लगे।

 

एकाएक आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने संचालक से माइक लिया और कहा कि महापौर सुनील उनियाल गामा व दर्जाधारी नरेश बंसल मंच पर आ जाएं। हरक सिंह रावत के ऐसा कहते ही आयोजकों के हाथ-पांव फूल गए। तत्काल आयुष सचिव दिलीप जावलकर महापौर के पास पहुंचे और उनसे मंच पर आने का आग्रह करने लगे।

 

इस दौरान महापौर ने विरोध जताते हुए कहा कि आयोजकों को प्रोटोकॉल का भी ध्यान नहीं है। उन्होंने कार्यक्रम में आने के दौरान ही आयोजकों के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। जैसे-तैसे कर महापौर को मंच पर ले जाया गया। डॉ. हरक सिंह रावत के बगल में उनके बैठने की व्यवस्था की गई।

 

इसके बाद तत्काल आयोजकों ने उनके सामने टेबल पर महापौर के नाम की पट्टिका भी लगा दी। तब जाकर महापौर का गुस्सा कुछ शांत हुआ और आयोजकों ने राहत की सांस ली।

 

नहीं रखा प्रोटोकॉल का ध्यान

 

महापौर सुनील उनियाल गामा के मुताबिक, आरोग्य मेला आयोजकों ने प्रोटोकॉल का भी ध्यान नहीं रखा। बताने के बावजूद मंच पर मेरे बैठने की व्यवस्था नहीं की गई। मैंने मंच पर मुख्य अतिथि राज्यपाल के समक्ष भी प्रोटोकॉल की बात रखी, जिसे उन्होंने उचित ठहराया। मेरा स्वभाव बेहद सरल है। मेरी आयोजकों के प्रति अब कोई नाराजगी नहीं है।

 

शोधार्थी को जैव विविधता पार्क की दरकार : बालकृष्ण

 

पतंजलि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि देश की साठ फीसद वनस्पतियां उत्तराखंड में पाई जाती हैं। नई प्रजातियों की खोज व उनके आयुर्वेद में प्रयोग के लिए सरकार को एक जैव विविधता पार्क (हर्बल गार्डन) स्थापित करना चाहिए, ताकि शोधार्थी उस पार्क में जाकर शोध कार्य करें।

 

परेड ग्राउंड में बुधवार से शुरू हुए पांच दिवसीय राष्ट्रीय आयुष मेले के उद्घाटन मौके पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि अनुमान है कि उत्तराखंड में करीब 12 हजार वनस्पतियों की प्रजातियां हैं। इन वनस्पतियों की सही पहचान व गणना के लिए बॉटनीकल सर्वे ऑफ इंडिया को सर्वे करना चाहिए, ताकि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के शोधार्थियों को इसका लाभ मिले।

 

बालकृष्ण ने बताया कि स्वयं उन्होंने एक अभियान के तहत वर्षों पहले हरियाणा में 60 हजार एकड़ में फैले ‘मोरनी हिल’ को तैयार करवाया। जिसका परिणाम यह रहा कि कुछ वर्षों बाद मोरनी हिल के सघन वन में 250 से अधिक वनस्पतियों की पहचान की गई थी। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में हाथी, हिरण, बाघों आदि के लिए बाड़े बनाए गए हैं तो शोधार्थियों के लिए एक जैव विविधता पार्क होना चाहिए।

 

उधर, मौके पर ही आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने आचार्य बालकृष्ण को बताया कि नमामि गंगे के तहत सरकार ने ऋषिकेश के समीप जैव विविधता पार्क स्थापित किया है, जिसके लिए करीब आठ करोड़ का प्रावधान किया गया है।

 

69 देशों के 10 करोड़ लोगों का इलाज हुआ

 

पतंजलि योगपीठ के महामंत्री व पतंजलि आयुर्वेदिक विवि के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि हरिद्वार पतंजलि योगपीठ में अभी तक 69 देशों के करीब 10 करोड़ लोगों का आयुर्वेदिक विधि से इलाज किया जा चुका है। पीठ की ओर से प्रदेश के 17 स्थानों पर क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। उन्होंने बताया कि योगपीठ ने देशभर के एक करोड़ से अधिक लोगों के इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (ईएमआर) सुरक्षित रखे हैं।

 

आरोग्य हैं तो जीवन मेला है: चिदानंद

 

परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परम अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आरोग्य हैं तो जीवन मेला है। यदि तन स्वस्थ नहीं है तो मेला हो या कोई अन्य आयोजन व्यक्ति का वहां मन नहीं लगता है, उसे बस घर जाने की लगी होती है।

इसलिए आरोग्य मेले की उपयोगिता सबको समझनी होगी और उसका अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि नियमित योग, प्रणायाम और शाकाहारी भोजन ग्रहण करने वाला व्यक्ति कभी भी कोरोना जैसी घातक बीमारी की चपेट में नहीं आ सकता है।

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