Home देश/प्रदेश अलकनंदा-मंदाकिनी के घाटों पर लगा रेत और बजरी का अंबार

अलकनंदा-मंदाकिनी के घाटों पर लगा रेत और बजरी का अंबार

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अलकनंदा-मंदाकिनी के घाटों पर लगा रेत और बजरी का अंबार

रुद्रप्रयाग: मॉनसून सीजन को बीते लगभग तीन महीने हो गये हैं बावजूद इसके अलकनंदा और मंदाकिनी नदी के तट पर बनाये गये घाटों पर अभी भी रेत और मिट्टी के ढ़ेर लगा हुआ है.करोड़ों की लागत से बनाये गये ये घाट मिट्टी और रेत के ढे़र में कहीं अपनी सुंदरता खोते जा रहे हैं. स्थानीय जनता लंबे समय से घाटों पर फैली इस अव्यवस्था को दूर करने की मांग कर रही है मगर नगर पालिका प्रशासन इस मामले में कुछ भी करने को तैयार नहीं है.

दरअसल, मॉनसून सीजन के दौरान मंदाकिनी और अलकनंदा नदी का जल स्तर बढ़ने से घाट जलमग्न हो जाते हैं. उफनती नदी के साथ लाखों टन मलबा घाटों के किनारे जमा हो जाता है. जिससे पुनर्निर्मित किये घाट एक बार फिर से पहले वाले स्थिति में आ जाते हैं. बता दें अलकनंदा नदी किनारे हनुमान मंदिर के नीचे करोड़ों रुपये की लागत से साल 2017 में ही घाटों का निर्माण करवाया गया था. लेकिन मॉनसून सीजन के बाद ये घाट रेत और मिट्टी के ढ़ेर से पटे पड़े हैं. यहां घाटों पर हजारों टन रेत-बजरी और मलबा जमा हुआ है.

इस मॉनसून सीजन में घाटों पर निर्मित शौचालयों के दरवाजे, स्ट्रीट लाइटों की बैटरियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं. जिससे घाटों की सुंदरता धूमिल हो रही है. इसके अलावा घाटों की किसी भी प्रकार से देख-रेख न होने के कारण घाटों पर कूड़े का अंबार भी लगा हुआ है. जिसके कारण स्थानीय लोगों में इसे् लेकर खासा रोष है. स्थानीय लोग इसकी शिकायत कई बार नगर पालिका प्रशासन से भी कर चुके हैं लेकिन अभी तक सिफर ही निकला.

नगर पालिका अधिशासी अधिकारी कुमारी सीमा रावत का कहना है कि नगर पालिका के पास घाटों की सफाई के लिए पैसा नहीं है. उन्होंने बताया कि इसके लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है जिसमें कहा गया है कि घाटों पर जमा रेत व बजरी के चुगान की अनुमति दी जाय. जिससे रेत व बजरी को बिकवाकर पालिका पैसा एकत्र कर घाटों की मरम्मत कर सके. उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी से स्वीकृति मिलने के बाद कार्य शुरू करवा दिया जायेगा.

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