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अब बीएडीपी मद से हो रहे प्रशिक्षणों में भी धांधली का आरोप

चम्पावत: बीएडीपी के निर्माण कार्यो में धांधली के बाद योजना के तहत दिए जा रहे विभिन्न प्रशिक्षण पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों ने निर्माण कार्यो के बाद अब आरोप लगाया है कि विभाग प्रशिक्षण मद में दस लाख रुपये तक की धनराशि बिना टेंडर निकाले चहेती संस्थाओं को कार्य दे रहे हैं। जबकि नियमत: ढाई लाख से अधिक के कार्य के लिए टेंडर निकालना जरूरी है।

बीएडीपी के तहत वर्तमान मौन पालन, साग-सब्जी उत्पादन, साहसिक प्रशिक्षण, कृषि उत्पादन आदि के प्रशिक्षणों के लिए बीएडीपी मद से विभागीय व स्वयंसेवी संस्थाओं को धनराशि आवंटित की गई है। कई संस्थाओं को प्रशिक्षण के लिए दस लाख तक की धनराशि बिना टेंडर के आवंटित कर दी जा रही है।

बीएडीपी से हो रहे विकास कार्यों में धांधली का आरोप लगाने वाले दान सिंह बोहरा, नाथ सिंह बोहरा, राजू सिंह आदि ने बताया कि लोगों को प्रशिक्षण देने के नाम पर संस्थाओं का चयन सेटिंग गेटिंग के आधार पर किया जाता है और उन्हें बिना टैंडर प्रक्रिया अपनाए आठ से दस लाख रुपया दे दिया जा रहा है।

उनका कहना है कि प्रशिक्षण के नाम पर चयनित एनजीओ अधिकारियों के साथ मिलकर प्रशिक्षण के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से स्वयं सेवी संस्थाओं को प्रशिक्षण के नाम पर दी जा रही धनराशि की जांच करने की मांग की है।

विभागीय प्रशिक्षण विभाग द्वारा कराने पर किसी टेंडर की आवश्यकता नहीं है, अगर किसी बाहरी संस्था से प्रशिक्षण कराया जाएगा तो टेंडर जरूरी है। अगर ऐसा कहीं हुआ है तो इसकी मामले की जांच कराई जाएगी।

बीएडीपी योजना के तहत जिला पंचायत व जल निगम द्वारा बाहर के समाचार पत्रों में गुपचुक तरीके से टेंडर विज्ञापन प्रकाशित करने का मामला शांत होता नहीं दिख रहा है। मामले में क्षेत्र के कुछ ठेकेदारों ने टेंडर निरस्त न किए जाने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर किए जाने की बात कह रहे हैं। जिसके बाद अधिकारियों में खलबली मची हुई है।

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