Home राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका पर राष्ट्रीय सम्मेलन मे चिंता व्यक्त

मीडिया की भूमिका पर राष्ट्रीय सम्मेलन मे चिंता व्यक्त

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नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय कालिंदी कालेज के वाणिज्य व पत्रकारिता विभाग तथा भारतीय जनसंचार संघ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘स्वतंत्रता के बाद भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में मीडिया की भूमिका’ विषय पर अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन 7 नवम्बर को मीडिया के विभिन्न प्रारूपो मे ख्यातिप्राप्त प्रबुद्ध मीडिया कर्मियों की उपस्थिति व उनके द्वारा दिए सारगर्भित वक्तव्यो के साथ सम्पन्न हुआ।

प्रो.विभूति नारायण राय (आईपीएस) पूर्व कुलपति महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्व विद्यालय (वर्धा) की अध्यक्षता मे आयोजित राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन मे देश-विदेश की मीडिया के विभिन्न प्रारूपो व पत्रकारिता की शिक्षा से जुड़े ख्यातिप्राप्त मीडिया कर्मियों के साथ-साथ दिल्ली विश्व विद्यालय कालिंदी कालेज के पत्रकारिता व वाणिज्य विभाग की करीब दो सौ छात्रोंओ व शिक्षिकाओ की उपस्थिति मुख्य रही।

आयोजित सम्मेलन अध्यक्ष के सानिध्य मे आमंत्रित वक्ताओ व आयोजको के कर-कमलो दीप प्रज्वलन की रश्म के साथ राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन का शुभारंभ कालिंदी कालेज दिल्ली विश्व विद्यालय प्राचार्य डॉ अंजुला बंसल के स्वागत भाषण से आरम्भ हुआ। अपने संबोधन मे प्राचार्य द्वारा सभी वक्ताओ व अन्य गणमान्य अतिथियो का स्वागत कर, कालेज की शिक्षा व्यवस्था व मिली उपलब्धियों व सफलताओं तथा दिल्ली विश्व विद्यालय के कालेजो मे कालिंदी कालेज के उच्च स्थान के बावजूद अवगत कराया। कालेज के आगामी क्रियाकलापो व योजनाओं पर प्रकाश डाला। मीडिया की बढ़ती व्यवसायिकता पर चिंता व्यक्त कर उसके निराकरण पर विचार व्यक्त किए।

आयोजन सत्र का उदघाटन करते हुए कालिंदी कालेज संचालन समिति अध्यक्ष व दिल्ली विश्व विद्यालय मे हिंदी पत्रकारिता के प्रो.(डॉ) पुरन चंद्र टंडन ने अपने संबोधन में व्यक्त किया, आज भारतीय पत्रकारिता के इस महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय सेमिनार चर्चा के विमर्श से कुछ तथ्य निकलेंगे। उन्होंने कहा, मीडिया प्रहरी की तरह रहने वाला एक अनुशासन है। मीडिया की जिम्मेवारी अलग-अलग आयामो मे है। मीडिया दैनिक दिन चर्या का अभिन्न अंग बन गया है। पूजा स्थलों से लेकर शयन कक्ष तक पहुंच गया है। मीडिया की भूमिका क्या है? आने वाली पीढ़ी को क्या दे सकती है? इस पर आज इस राष्ट्रीय सम्मेलन में चर्चा हो।

संचालन समिति अध्यक्ष ने व्यक्त किया, मोबाइल से वैश्विक ज्ञान को जान सकते हैं, परन्तु मीडिया का स्वरूप क्या हो, इस पर सोचना होगा। मीडिया कर्मी की जिम्मेवारी क्या है? समाज में क्या भूमिका निभा सकते हैं? इस पर चर्चा जरूरी है। मीडिया के मूल्य बनाए रखना जरूरी है। मिल कर इस प्रासंगिक विषय पर चर्चा करे।

संस्थापक अध्यक्ष भारतीय जनसंचार संघ प्रो.(डॉ) रामजीलाल जांगिड़ ने पांच सत्रो तक चलने वाले राष्ट्रीय सेमिनार के विषयों की जानकारी दी। व्यक्त किया, मीडिया भय फैला रहा है। सुबह उठते ही बाहर झांको, विज्ञापन नजर आता है।

खबर पढ़ते ही अखबार मे छपी खबर पुरानी लगने लगती है। टीवी व इंटरनैट खबर जानने के लिए खोला जाता है, क्या परोसा जा रहा है, इसका सकारात्मक या नकारात्मक समाज के लोगों मे क्या प्रभाव पड़ेगा, इसी को समझने के लिए सम्मेलन आयोजित किया गया है।

उद्देश्य है प्रौद्योगिकी व विकास हो रहा है, ऐसे में नयी तकनीक को जानना जरूरी है। घटित घटना की खबर प्रत्येक मीडिया मे अलग-अलग तरह से छपती व प्रसारित होती है। सही क्या है, जानना जरूरी है। यही जानने को सम्मेलन आयोजित किया गया है।

सम्मेलन मे प्रतिभाग कर रही पत्रकारिता की छात्राओं को इंगित करते हुए भाषायी पत्रकारिता के भीष्म पितामह प्रो.(डॉ) रामजीलाल जांगिड़ ने कहा, भ्रष्टाचार की खबर पर प्रकाश डालने, छापने व प्रसारित करने पर पत्रकारो को प्रताड़ित किया जाता है, यहां तक कि हत्या तक कर दी जाती है।

शिक्षा ले रहे गरीब छात्रो को रोटी मे नमक देने की खबर उठाने पर पत्रकार को सताया जाता है, उस पर तंज कसे जाते हैं। जनतंत्र को बचाना है, बुनियादी हक जानना है, तो पूछिए ये कारण क्या हैं? लोगों के हित में सवाल पूछिए।

आयोजित सेमिनार मे प्रतिभाग कर रहे अनुभवी मीडिया से जुड़े कर्मियो से पूछे। पत्रकार ईमानदार रहे। पेशे के प्रति संकल्प ले। समाज के हित में सोचे। तभी आप मे समाज हित मे शक्ति पैदा होगी।

अध्यक्षीय संबोधन मे प्रो.विभूतिनारायण ने व्यक्त किया, आज हम नई तरह की जिंदगी मे जी रहे हैं।

आज कितनी खबरे प्रायोजित हैं? छपे शब्दो मे क्या छिपा है? अधिकार है, सही सूचना प्राप्त करने का। उदारीकरण के बाद अखबार फायदे के लिए निकल रहे हैं।

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