Home विशेष चीन की मंडी में बढ़ी भारतीय इत्र व मिश्री की मांग

चीन की मंडी में बढ़ी भारतीय इत्र व मिश्री की मांग

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धारचूला (पिथौरागढ़) : भारत-चीन संबंधों को लेकर भले ही तमाम विवाद हों लेकिन दुनिया में सबसे ऊंचाई वाले दर्रे से होने वाले भारत-चीन व्यापार के दौरान भारत और तिब्बती व्यापारियों के बीच दोस्ताना व्यवहार रहता है। तिब्बती मंडी में भारतीय कॉफी, सुर्ती, कॉस्मेटिक सामान, इत्र सहित गुड़ और मिश्री की मांग रहती है। भारतीय व्यापारी चीनी रजाई, जूते, जैकेट, छिरबी और चौरगाय (याक की पूंछ ) का आयात करते हैं।

भारत चीन व्यापार 31 अक्टूबर को समाप्त हुआ है। साढ़े तीन माह तिब्बती मंडी तकलाकोट में प्रवास कर भारतीय व्यापारी धारचूला पहुंचने लगे हैं। 31 अक्टूबर की सुबह तक सभी व्यापारी लिपू दर्रा पार कर भारतीय सीमा में प्रवेश कर चुके थे। भारत लौटने के बाद व्यापारियों को अपना सामान घोड़े और खच्चरों की पीठ पर ढुलान कर लगभग 60 किमी पैदल चल कर धारचूला पहुंचना होता है। इससे पूर्व व्यापारियों को कस्टम की सभी औपचारिकताएं निभानी होती हैं। जिसमें तीन से चार दिन का समय लग जाता है। भारत में प्रवेश के उपरांत धारचूला पहुंचने तक सात से आठ दिन लग जाते हैं।

तकलाकोट में व्यापार करने वाले व्यापारी जगदीश सिंह गब्र्याल और अर्चना धारचूला पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस बार गुड़ और मिश्री में लंबे समय तक प्रतिबंध रहने के कारण व्यापार प्रभावित हुआ। प्रतिबंध समाप्त होने के बाद गुड़ और मिश्री काफी मात्रा में बिकी। इसके अलावा तिब्बती मंडी में लुधियाना के ऊनी वस्त्रों की मांग रही। व्यापारियों के अनुसार भारतीय कॉस्मेटिक सामान के तिब्बती दीवाने हैं और इसकी गुणवत्त्ता को देखते इसकी मांग रही।

69 व्यापारी और 196 सहायक गए थे व्यापार में

इस वर्ष भारत चीन व्यापार में 69 व्यापारी, 196 सहायकों ने भाग लिया। अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं पर्यटन अधिकारी धारचूला/गुंजी से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष कुल 1,91,77,339 रु पए का आयात और 1,25,22,670 रुपए का सामान का निर्यात हुआ है।

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